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Samvardhini 20 June 2012 विवेकानन्द केंद्र कन्याकुमारी की उपाध्यक्ष सुश्री निवेदिता भिड़े ने आज यहाँ कहा है कि स्त्री परिवार समाज और राष्ट्र की मुख्य धुरी होती है, उसके बिना विकास की कल्पना ही निरर्थक है। माँ के रूप में वह बालक को जो संस्कार देती है उन्हीं से बालक महान, तेजस्वी और युगनिर्माता बनते है।

सुश्री निवेवेदिता जी आज यहाँ स्वामी विवेकानन्द सार्ध-शती समारोह के प्रांतीय कार्यालय में नगर की महिलाओं को संबोधित किया। उन्होने कहा कि सार्ध-शती समारोह की शृंखला में एक आयाम ‘संवर्धिनी’ का है जिसमें भारतीय नारी की विधायी शक्ति का उपयोग“भारत जागो : विश्व जगाओ” धेय की पूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि नारी स्वातंत्र्य अथवा अपने अधिकारों की माँग आदि जैसे नारे पश्चिमी सोच का परिणाम है जिसके नकारात्मक परिणाम यूरोप और अमेरिका आज भी भुगत रहा है। वहीं भारतीय सोच इस दिशा में सदैव सकारात्मक रहा है, भारत में स्त्री को माँ, बहन, भार्या और पुत्री जैसा श्रद्धेय स्थान दिया गया है। हमारे यहाँ प्रारम्भिक काल में महिलाएँ पुरुष से कन्धे से कन्धा मिला कर समाज के उन्नयन के लिए कार्य करतीं थीं। वे शास्त्रज्ञ, दार्शनिक और गुरु जैसे महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वाहन करतीं थीं परंतु बीच के काल में विदेशी सांस्कृतिक हमलों के कारण वह मात्र भोग्या बन कर रह गई। पर अब समय आ गया है कि उसे उसका खोया दर्जा व सम्मान पुन: प्राप्त करना है। इसके लिए महिलाओं को स्वयं सक्षम व समर्थ बनना होगा।

सुश्री निवेदिता दीदी ने कहा कि महिलाओं को देखने की दृष्टि में जब तक योग्य और उचित परिवर्तन नहीं होगा तब तक समाज और राष्ट्र का कल्याण की संकल्पना ही निरर्थक है। उन्होने कहा कि भारत के मौलिक विचार एकात्म की अवधारणा पर केंद्रित है जिसे अब विज्ञान भी स्वीकारने लगा है। व्यक्ति – परिवार – समाज - राष्ट्र - श्रष्टि के बीच परस्पर निर्भरता, पूरकता और सम्बद्धता जिस स्वाभाविक प्रक्रिया से स्थापित है उसका अन्य कोई विकल्प संभव ही नहीं है। उन्होने कहा कि स्वामी विवेकानन्द की सार्ध-शती संपूर्ण मानवता के लिये एक अपूर्व अवसर है और यह अवसर भारत ही उसे प्रदान करने वाला है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुये बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीमती उषा चतुर्वेदी ने कहा कि विचार के सकारात्मक परिवर्तन से ही वांछित परिणाम लाये जा सकते हैं। उन्होने कहा कि स्वामी जी स्त्री शिक्षा के प्रबल समर्थक थे और उनके विचारों और संकल्प को हमें घर-घर तक पहुँचने की आवश्यकता है। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक के निर्वृत्तमान सरसंघ चालक श्री के. सी. सुदर्शन भी मौजूद थे।

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