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कार्यक्रम संचालक प्रथम वक्ता डॉ नीतीश प्रियदर्शी,  सहायक प्रोफेसर, भू-विज्ञान  विभाग, रांची विश्वविद्यालय द्वितीया  वक्ता  श्री प्रदीप हज़ारी, कृषि विभाग के विशेष सचिव, झारखण्ड सरकार

विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी, शाखा-रांची के द्व्रारा "कोविड-19 में युवाओ की मनःस्थिति एवं दिशा" विषय पर ऑनलाइन विमर्श का आयोजन किया गया।  इस विमर्श में दो मुख्य वक्ताओ ने अपने विचरो से श्रोताओं का मार्गदर्शन किया। 

प्रथम वक्ता डॉ नीतीश प्रियदर्शी,  सहायक प्रोफेसर, भू-विज्ञान  विभाग, रांची विश्वविद्यालय के विचार 

• आत्महत्या जैसे चीज प्रकृत्ति के नियम के विरुद्ध है।
•  समय से अनुसार अपने को परिवर्तित करना। 
• अगर पृथ्वी को डिप्रेसन हो गया तो हमरा क्या होगा, इसलिए हमें भी पृथ्वी की तरह सहनसील बने।
• जो व्यक्तो, समाज, राष्ट्र निष्क्रिय हो जाता है उसका विनाश प्रारम्भ हो जाता है। जैसे :- डाइनासोर 
• अगर आप निष्क्रिय होंगे तो प्रकृति आपको नष्ट कर द्वगी। 
• जिस प्रकार नदी का पानी रुकने पर वो पानी खराब हो जाती है।
• हमसे अपने आप को  व्यस्त रखे । 
• प्रकृति में सब गतिमान है। हम क्यो रुके।
• जब हम प्रकृति सैट छेड़-छाड़ करते है तभी हम कोरोना जैसे महामारी से जूझना पड़ रहा है।

द्वितीया  वक्ता  श्री प्रदीप हज़ारी, कृषि विभाग के विशेष सचिव, झारखण्ड सरकार के विचार 

मेरे चार प्रश्न है कि  इस लॉकडाउन में 
1. क्या ऐसा कुछ विचित्र हुआ है?
2. अगर हुआ है तो कितना विचित्र हुआ है?
3. क्या यह चुनौती बन कर आई है? 
4. तो क्या यह अवसर बन कर आई है?

"एक चुनौती एक अवसर नही बल्कि हज़ारो अवसर ले कर आती है" 


• कोरोना काल को एक अवसर के तरह लें। जो हज़ारो अवसर हर आयु वर्ग के लिए लाया है। 
• अगर हम अनुशासित होते तो कोरोना हमारे पास नही आती। 
• कोरोना काल मे खुद से चार प्रश्न पूछिये।
1. क्या हम डर में जी रहे रहे?
2. क्या हम डिप्रेशन में जी रहे है?
3. क्या हम अकेलापन महसूस कर रहे है?
4. क्या हम वोर महसूस कर रहे है?
• दर किस बात का है:- इन्फेक्शन हो जाएगा इसका या हमारी व्यापार, पढ़ाई, कैरियर खत्म हो जाएगा। पहले अपने दर तो समझिए। और उसको अवसर बनाये। 
• सरकार के गाइड लियॉन को फॉलो करें।

• आज से तीन महीना पहले मोबाइल, लैपटॉप को समय नष्ट करना का साधन माना जाता था लेकिन आज वही उपक्रम आपके लिए उपयोगी है, लेकिन उसमें भी हमे अनुशासन का ध्यान रखना पड़े गा।
• कोरोना काल मे एक चिंता है विषय रहा जो कि है प्रवाशी मजदूर। लेकिन मैंने ऐसे भी मजदूरों को देख जो कि कोरोना काल के पहले इडली भेज करता था कोरोना काल में बंद हो गया तो उसने मछली बेचना शुरू किया । क्योंकि मछली पर सरकार का रोक नही था। यानी उसने कोरोना काल को अवसर के रूप में लिया और भी बहुत सारी ऐसे मजदूर जो कि खेतो में अच्छी फसल उगाने में लग गए।

 

कार्यक्रम का संचालन श्री राजेश अग्रवाल, सह नगर संयोजक द्वारा हुआ। धन्यवाद ज्ञापन देते हुए  श्रेयांश भारद्वाज जी ने वक्ता ओर स्रोता को धन्यवाद दिया। 
 कार्यक्रम का समापन शांति मंत्र से हुआ। 

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