विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी, जबलपुर द्वारा महाकौशल कॉलेज, जबलपुर के विशेष सहयोग से विश्व बंधुत्व दिवस के अवसर पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस गरिमामयी कार्यक्रम में महाविद्यालयीन स्टाफ, कार्यकर्ताओं और छात्र-छात्राओं सहित कुल 200 प्रतिभागियों ने सहभागिता की।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं को स्वामी विवेकानन्द जी के विचारों से प्रेरित कर भारतीय गौरव, आत्मविश्वास, चरित्र निर्माण एवं राष्ट्र निर्माण के कार्यों से जोड़ना था। आयोजन में मुख्य अतिथि श्री मदन ठाकरे, महाकौशल कॉलेज के प्राचार्य श्री अलकेश चतुर्वेदी, विवेकानंद केंद्र के विभाग संचालक श्री वेद प्रकाश, विभाग संगठक सुश्री माया पराड़कर, विभाग प्रमुख श्री मोहन चक्रवैश्य तथा नगर प्रमुख श्री अनिकेत गौरिया सहित समिति के श्री इंद्रजीत चौहान, श्री अभिषेक श्रीवास्तव, श्री विनय पटेल, श्री दुर्गेश, श्री जीतू एवं अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि 11 सितम्बर 1893 को शिकागो की विश्व धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद द्वारा दिया गया ऐतिहासिक उद्बोधन केवल एक भाषण नहीं, बल्कि विश्व मंच पर भारत के सभ्यतागत आत्मविश्वास की उद्घोषणा थी। उन्होंने अपने संबोधन के माध्यम से भारतीय संस्कृति के ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ और विश्व बंधुत्व के संदेश को संपूर्ण विश्व तक पहुंचाया। वक्ताओं ने रेखांकित किया कि औपनिवेशिक शासन के दौर में भी स्वामी जी ने भारतीय युवाओं को अपनी संस्कृति, ज्ञान परंपरा और सामर्थ्य पर विश्वास करना सिखाया, जो 133 वर्ष बाद भी उतना ही प्रासंगिक है।
वर्तमान युवा पीढ़ी की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए वक्ताओं ने कहा कि देश की वास्तविक युवा शक्ति शिक्षा, नवाचार, स्टार्टअप, खेल, तकनीक, सेना और समाज सेवा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रही है। वक्ताओं ने कहा कि आज के युवाओं के पास सूचना और तकनीकी संसाधनों की प्रचुरता है, किंतु सूचना को विवेक में, ऊर्जा को सृजन में तथा असहमति को सकारात्मक परिवर्तन में बदलने के लिए सही दिशा आवश्यक है। यह दिशा स्वामी विवेकानंद के विचारों से प्राप्त हो सकती है। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे ज्ञान, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता, स्वदेशी उद्योग, नवाचार तथा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन में सक्रिय भूमिका निभाएं।
कार्यक्रम में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि आधुनिकता और भारतीयता परस्पर विरोधी नहीं हैं। आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के समन्वय से ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव है। वक्ताओं ने कहा कि “Gen-Z समस्या नहीं, बल्कि भारत की सबसे बड़ी संभावना है।” आवश्यकता इस पीढ़ी को स्वामी विवेकानंद के आत्मविश्वास, चरित्र, सेवा, साहस और विश्व बंधुत्व के आदर्शों से जोड़ने की है।
मुख्य अतिथि श्री मदन ठाकरे ने भी युवाओं से राष्ट्रहित में अपनी प्रतिभा और ऊर्जा का उपयोग करने का आह्वान किया।
अंततः कार्यक्रम के माध्यम से सभी युवाओं को स्वामी जी के विचारों के अनुरूप आत्मविश्वासी, चरित्रवान एवं राष्ट्रनिष्ठ नागरिक बनने का सशक्त संदेश दिया गया।








