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विश्व बंधुत्व दिवस कार्यक्रम

11 सितंबर 2021 शनिवार शाम 5 बजे विवेकानंद केंद्र शाखा भोपाल  द्वारा "विश्व बंधुत्व दिवस" 45 बंगले टी टी नगर स्थित केंद्र कार्यालय में मनाया गया । कार्यक्रम में मुख्य वक्ता  माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के उप कुलपति श्री के जी सुरेश थे तथा अध्यक्षता शिक्षा विभाग के उप संचालक डॉ. धीरेन्द्र चतुर्वेदी जी ने की. इस अवसर पर विवेकानंद केंद्र के प्रांत सह संचालक श्री रामभुवन सिंह कुशवाहा जी व श्री ब्रजकिशोर सांघी जी विभाग संचालक ने "श्रीफल तथा साहित्य" द्वारा कार्यक्रम के मुख्य वक्ता व अध्यक्ष महोदय का स्वागत किया।पश्चात् गीत भाई सौरभ ने प्रस्तुत किया ।
"हिन्दू धर्म संपूर्ण विश्व को सहिष्णुता तथा सार्वभौम स्वीकृति की शिक्षा देता है । हम हिंदु स्वीकार्यता को धर्म मानते हैं किंतु इसकी नकारात्मक छवि बनाने का वैश्विक षडयंत्र कर विश्व को भ्रमित करने का अभियान चलाया जा रहा है।"
उपरोक्त उद्गार कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री के जी सुरेश ने  स्वामी विवेकानंद द्वारा 128 वर्ष पूर्व शिकागो की धर्म सांसद में हिंदु धर्म पर दिये गये एतिहासिक व्याख्यान की स्वर्णिम स्मृति के उपलक्ष में व्यक्त किये । उन्होने अपने उद्बोधन में आगे कहा कि, हमारा धर्म सभी विचार और मत मतांतरों को स्वीकार करता है। सहिष्णुता के नाम पर इसकी नकारात्मक छवि  प्रस्तुत कर दुनिया को भ्रमित करने के वैश्विक षडयंत्र के प्रयासो पर आज भारतीय बुद्धिजीवियों को विचार करने की महती आवश्यकता है। हमे यह भी चिंतन करना होगा 
न केवल अपने देश अपितु विदेशों(अमेरिका आदि)  मे भी कुछ समूह जो भारत की उभरती छवि, बढ़ते आत्मविश्वास और प्राप्त वैश्विक मान्यता से परेशान होकर तथा निहित स्वार्थ से प्रेरित होकर आज ही के दिन "हिन्दुत्व खत्म करो" जैसे विषय पर सम्मेलन कर रहे हैं वे अपने इन कुत्सित प्रयासो के द्वारा दुनिया को असल मुद्दो से  दिग्भ्रमित न कर पाएँ हमे यह भी चिंतन करना होगा ।
स्वामीजी ने कहा कि "सभी धर्म बराबर हैं तथा ईश्वर तक पहुँचने के रास्ते हैं ।" श्री सुरेश जी ने इसी भाव से उत्प्रेरित होकर प्रकाश डाला कि, हमारा धर्म सहिष्णुता की नहीं ,अपितु ,सबको स्वीकार करने का बात करता है ।उन्होने अपने उद्बोधन मे स्वामी जी के हिंदु दर्शन की चर्चा करते हुए, समसामयिक चुनौतियों जैसे 'जिहाद की मानसिकता,' आज की शिक्षा प्रणाली तथा 9 सितम्बर अमेरिका के ट्विन टॉवर पर "आतंकी हमला" आदि विषयों पर भी विमर्श किया और कहा कि, यह घटनाएँ एक तरफ जहाँ विध्वंस का उदाहरण प्रस्तुत करती हैं,वही दूसरी तरफ स्वामीजी का "शिकागो मे दिया गया भाषण" आज जब विश्व 'मानवता व विश्वास' को लेकर अनेक कठिनाईयों से जूझ रहा है,सृजन का नव निर्माण का संदेश देता है ।आज सवा सौ साल बाद भी स्वामीजी के विचार उतने ही प्रासंगिक हैं ,जितने उस काल मे थे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे श्री धीरेन्द्र चतुर्वेदी जी ने स्वामीजी द्वारा दिये गये प्रेरक संदेशों व उनके जन मानस को प्रेरित करने वाले विचारों को समाज मे व्यापक रूप से प्रसारित व प्रचारित करने की बात कही, और यह भी कहा कि, हम इन नित्य अनुकरणीय महापुरूषों को सिर्फ जयंती व दिवस विशेष पर याद कर लेते हैं,फिर भूल जाते हैं, ऐसा नहीं होना चाहिये ।
कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार श्री पंकज पाठक जी (संपर्क प्रमुख, विवेकानंद केंद) ने किया तथा अंत में आभार प्रदर्शन केंद्र के नगर संचालक श्री सुरेंद्र मित्तल जी द्वारा किया गया। कार्यक्रम का समापन भाई धार्मिक द्वारा "शांति मंत्र व केंद् प्रार्थना" के साथ संपन्न हुआ।

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