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Yuva-Prerana-Shibir-Nagpur-2016

नागपुर, अप्रैल 12 : ‘देशभक्ति फिर जगे, देश का ये प्राण है’ इस थीम पर आधारित युवा प्रेरणा शिविर में तरुणों ने अपने विद्यार्थी जीवन में देश, समाज और परिवार में अपनी भूमिका को लेकर गहन विमर्श किया।

विवेकानन्द केंद्र कन्याकुमारी, शाखा नागपुर की ओर से आयोजित इस दो दिवसीय युवा प्रेरणा शिविर में 10, 11 और 12 के विद्यार्थी सम्मिलित थे। विशेष बात यह रही कि इस शिविर का संचालन और व्यवस्था युवाओं ने किया। शिविर के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए विवेकानन्द केंद्र की नागपुर नगर प्रमुख सौ.गौरीताई खेर ने कहा कि जीवन को सही दिशा में ले जाने के लिए युवावस्था महत्वपूर्ण पड़ाव है। युवापन में ही बड़े से बड़े संकटों से लड़ा जा सकता है। इसलिए युवावस्था में खूब मेहनत करना चाहिए।

इस शिविर में 4 बौद्धिक सत्र हुए। प्रथम सत्र ‘यह अपनी भारतमाता, सम्पूर्ण विश्व की माता’ इस विषय पर बोलते हुए भारत वाणी के सम्पादक तथा शिविर प्रमुख श्री लखेश्वर चंद्रवंशी ने बताया कि भारत विश्व की प्राचीनतम राष्ट्र है। भारत की संस्कृति, धर्म की अवधारणा और गौरवशाली अतीत को अनेक उदाहरणों के माध्यम से समझाते हुए लखेश ने कहा कि भारत पुण्यभूमि है, धर्म भूमि है, वीर भूमि है, वेद भूमि है। इसलिए वाल्मीकि से लेकर कालिदास, भारतेंदु से लेकर आज तक देश के जानेमाने कवि भारत की महिमा गाते हैं। उन्होंने कहा कि सम्राट भरत अपनी मातृभूमि को माता कहते थे। यही कारण है कि भरत की भूमि को भारतमाता के रूप में जाना जाता है और युगों से भारतमाता की जय का उद्घोष इस भूमि के लोग करते आए हैं। हम सभी उन्हीं के वंशज हैं इसलिए हम भी भारत को भारतमाता कहते हैं। क्रांतिकारियों ने भारतमाता को दुर्गास्वरूप मानते हुए अपने जीवन को राष्ट्र के लिए हंसते-हंसते अर्पित कर दिया था और आज भी हमारे सुरक्षाबल मातृभूमि के सजग प्रहरी बनकर सीमा पर प्राणों की बाजी लगाकर पहरा दे रहे हैं।

द्वितीय सत्र में केंद्र की जीवनव्रती कार्यकर्ता प्रियंवदाताई पांडे ने “राष्ट्रभक्त संन्यासी स्वामी विवेकानन्द” के जीवन और सन्देश को अनेक प्रसंगों के माध्यम से शिविरार्थियों के सम्मुख रखा। उन्होंने बताया कि स्वामी विवेकानन्द ने भारत के उत्थान को अपने जीवन का मिशन बनाया था। स्वामीजी ने जहां विश्व को भारत के गौरवमय संस्कृति और इतिहास से परिचित कराया, वहीं उन्होंने भारत में कोलम्बो से अल्मोड़ा तक भ्रमण करते हुए भारत की सुप्त चेतना को जगाया।

तीसरे बौद्धिक सत्र में नागपुर महानगर पालिका के सत्ता पक्ष नेता श्री दयाशंकर तिवारी ने देशभक्ति की आवश्यकता पर जोर दिया। ‘देशभक्ति फ़िर जगे, देश का ये प्राण है’ इस विषय पर बोलते हुए तिवारी ने कहा कि आज देश में भारतमाता की जय कहने को लेकर विवाद चल रहा है, यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने बताया कि हमारे शैक्षिक पाठ्यक्रम में देशभक्ति की प्रेरणा जगानेवाले पाठ नहीं होते, जिसके कारण अब की युवा पीढ़ी फूहड़ता में मजा लेने को मजबूर हैं। उन्होंने उधम सिंह, खुदीराम बोस, भगतसिंह, रामप्रसाद बिस्मिल और अशफ़ाक उल्ला खां के जीवन प्रसंगों को उल्लेख कर देशभक्ति के मर्म को समझाया।

शिविर का चौथा सत्र “देश की वर्त्तमान चुनौतियां और हमारी भूमिका” पर आधारित था। इस विषय पर बोलते हुए वरिष्ठ पत्रकार श्री विराग पाचपोर ने कहा कि हम बचपन से अपनी पाठशाला में नित्य रूप से प्रतिज्ञा करते हैं कि “भारत मेरा देश है।...” पर यह केवल रटा जाता है। यदि यह प्रतिज्ञा जीवन का संकल्प बन जाता तो जेएनयु जैसे शिक्षा संसथान में भारत की बर्बादी के नारे नहीं लगते। उन्होंने कहा कि सत्ता के लोभी लोग समझते हैं कि भारत का जन्म 1947 से हुआ है, जबकि भारत का इतिहास करोड़ों वर्ष पुराना है। पाचपोर ने कहा कि भारत के बारे में भारतीयों की अज्ञानता आज के सन्दर्भ में सबसे बड़ी चुनौती है। यह अज्ञानता देश के इतिहास को गलत ढंग से पढ़ाने के कारण हुआ।

शिविर में ‘विद्यार्थी जीवन और करियर’ को लेकर कार्यशाला का आयोजन किया गया। परसिस्टन्स कंपनी में बड़े पद पर कार्यरत श्री तुषार जोशी ने कहा कि विद्यार्थी जीवन में मन के बंदर विद्यार्थी को लक्ष्य से भटकाता है। इसलिए मन को सही दिशा देने के लिए एकाग्रता और संकल्प की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों का मजाक बनाकर विद्यार्थी गलत करते हैं। शिक्षकों के प्रति सम्मान और सहपाठी मित्रों में परस्पर सहयोग से ज्ञान बढ़ता है।

शिविर में योग, सूर्यनमस्कार, प्राणायाम के साथ ही दिनचर्या और मित्रता व जिम्मेदारी को लेकर शिविराथियों ने आपस में चर्चा की। शिविरार्थियों ने खेल सत्र के दौरान तितिक्षवर्धक, बलवर्धक, चापलातावर्धक तथा एकाग्रतावर्धक विविध मैदानी खेल का आनंद लिया। ‘भारत की विश्व को देन’ को लेकर मंथन किया। प्रेरणा से पुनरुत्थान सत्र में इनडोर गेम्स के साथ ही मदनलाल धींगरा-सावरकर प्रसंग तथा विवेकानन्द केंद्र के संस्थापक श्री एकनाथजी रानडे के जीवन पर आधारित वीडियो क्लिप दिखाया गया। इस सत्र में चंद्रशेखर आजाद के जीवन के प्रेरक प्रसंगों से युवाओं को अवगत कराया। शिविर में मदनलाल धींगरा-सावरकर प्रसंग और चंद्रशेखर आजाद पर आधारित नाटिका शिविरार्थियों ने प्रस्तुत किए। शिविर में कुल 16 तरुण तथा 6 युवा, ऐसे कुल 22 लोग सहभागी थे। शिविर की सफलता के लिए शिविर प्रमुख के साथ ही महेश गुप्ता, पंकज घटोड़े, वैभव जोशी, विपिन वैद्य, रोकेटसो माम, शोभाताई पितले, अरुणाताई देशपांडे आदि कार्यकर्ताओं ने महती भूमिका निभाई।     

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