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Guru poornima Ajmerआज जानकारी  गूगल से भी मिल जाता है किंतु  ज्ञान तो  गुरु से ही मिलता है।  भारतीय संस्कृति में गुरू का स्थान  गुरुत्व के कारण  है। गुरुत्व का ही प्रभाव है कि आज शिक्षा क्षेत्र में गुरुओं का सम्मान गर्व के साथ किया जाता है। विश्व में केवल भारत ही ऐसा देश है जिसका गुरुत्व पूरा विश्व मानता है और आज के समय में भी विभिन्न राष्ट्र भारतीय संस्कृति से जुड़ाव और उसके प्रति लगाव, खिचाव अनुभव करते हैं। मनुष्य में मनुष्यत्व होना ही गुरुत्व की पहली सीढ़ी होती है।उक्त विचार विद्या भारती के प्रान्त अध्यक्ष रामप्रकाष बंसल ने आध्यात्म प्रेरित सेवा संगठन विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी द्वारा 9 जुलाई को अजमेर नगर में पृथ्वीराज विस्तार शाखा चन्द्रवरदाई नगर में ए ब्लाॅक स्थित ओंकारेष्वर महादेव मंदिर परिसर में गुरूपूर्णिमा पर्व पर व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जीवन में पंचमहायज्ञ यथा ऋषियज्ञ, ब्रह्मयज्ञ, देवयज्ञ, बलिवैश्वयज्ञ और पितृयज्ञ की संकल्पना सभी को अपनानी चाहिए।

इस अवसर पर विषय प्रवर्तन करते हुए विवेकानन्द केन्द्र की प्रान्त संगठक और जीवनव्रती कार्यकर्ता सुश्री प्रांजलि येरिकर ने मंत्र शक्ति के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि प्रत्येक मंत्र तभी प्रभावी हो पाता है जब उसके पहले ओंकार जुड़ता है। यही कारण है कि विवेकानन्द केन्द्र में ओंकार को गुरु माना गया है। इस अवसर पर भजन संध्या का भी आयोजन हुआ। विवेकानन्द केन्द्र द्वारा पिछले दिनों आयोजित की गई परीक्षा दें हंसते हंसते कार्यषाला में सहभागी हुए जयन्त, कनिका, जान्हवी, निर्मल, कार्तिकेय, अक्षत एवं निरंजन को इस अवसर पर प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।

विवेकानन्द केन्द्र द्वारा ही गुरूपूर्णिमा पर अन्य कार्यक्रम रामकृष्ण विस्तार शाखा वैषाली नगर स्थित आराम होटल में आयोजित हुआ जिसमें मुख्य वक्ता प्रो. बद्रीप्रसाद पंचोली ने गुरूतत्व के महत्व पर प्रकाष डालते हुए बताया कि लोगों को भगवान के वाचिक स्मरण के स्थान पर उपनिषदों की षिक्षाओं के अनुरूप सही आध्यात्मिक इच्छाषक्ति का रूपांतरण करना होगा और इस पुनरूत्थान के उत्साह को राष्ट्रनिर्माण के कार्य में परिवर्तित करने से ही राष्ट्रोत्थान संभव है। विषिष्ट अतिथि उमेष कुमार चैरसिया ने विवेकानन्द केन्द्र का ध्येय बिना किसी व्यक्तिगत लाभ के आर्त और विपन्न की सेवा करना ही ईष्वर की आराधना माना गया है जिसे हमे नम्रतापूर्वक और ईष्वरीय योजना मानते हुए पूर्ण करने का आषीष ऊँकार स्वरूप गुरू से प्राप्त करना इस दिन की सार्थकता है। कार्यक्रम का शुभारंभ गुरूस्रोत पठन एवं भजन संध्या से हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता डाॅ. श्याम भूतड़ा ने की तथा संचालन नगर प्रमुख रविन्द्र जैन ने की।

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