विश्व बंधुत्व दिवस के पावन अवसर पर विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी, सागर शाखा द्वारा स्वामी विवेकानन्द जी के 11 सितम्बर 1893 को शिकागो में दिए गए ऐतिहासिक उद्बोधन की स्मृति में एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। शिक्षाविदों, युवाओं और कार्यकर्ताओं सहित कुल 75 प्रतिभागियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं एवं समाज के विभिन्न वर्गों को स्वामी जी के विश्व बंधुत्व, चरित्र निर्माण एवं राष्ट्र निर्माण संबंधी विचारों से परिचित कराना था। आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में अतिरिक्त जिला न्यायाधीश श्री राजेश सिंह तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में किशोर न्याय बोर्ड की प्रधान मजिस्ट्रेट श्रीमती वीणा अग्निहोत्री उपस्थित रहीं।
साथ ही, विवेकानंद केंद्र मध्य प्रांत की प्रांत संगठक सुश्री रचना जानी, धर्मेंद्र शर्मा तथा स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अनिल तिवारी की गरिमामयी उपस्थिति रही। मुख्य अतिथि श्री राजेश सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि स्वामी जी का शिकागो भाषण भारत की आत्मा का स्वर था; न्याय और विश्व बंधुत्व समान भाव पर आधारित हैं और उनके विचारों को अपनाकर समाज में अपराध व भेदभाव को कम किया जा सकता है।
प्रांत संगठक रचना दीदी ने रेखांकित किया कि संघर्ष और अशांति के वर्तमान दौर में स्वामी जी का सर्वधर्म समभाव का संदेश और भी प्रासंगिक हो गया है। विशिष्ट अतिथि वीणा अग्निहोत्री ने नारी शक्ति, युवा शक्ति और चरित्र निर्माण के महत्व पर बल दिया।
वहीं धर्मेंद्र शर्मा ने केंद्र की गतिविधियों का परिचय देते हुए “उत्तिष्ठत भारत” युवा प्रेरणा ऑनलाइन प्रतियोगिता की जानकारी दी, जिसके तहत 16 से 35 वर्ष के 5 लाख युवाओं को जोड़ने और 1,000 युवाओं को चरित्र निर्माण का प्रशिक्षण देने का लक्ष्य है।
अंत में, सभी उपस्थित जनों ने स्वामी जी के आदर्शों को अपनाकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का संकल्प लिया।
